चर्चा में क्यों है
केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) Amendment Bill 2026 पेश किया था विपक्ष के विरोध के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है जेपीसी गहन समीक्षा पूरी करके रिपोर्ट को 2026 के (Winter Session) शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में प्रस्तुत करनी होगी
Joint Parliamentary Committee (JPC) क्या है
संसद की एक विशेष समिति है जिसमें कुल 31 सदस्य शामिल होते हैं जिसमें से 21 सदस्य लोकसभा के तथा 10 सदस्य राज्यसभा के होते हैं जिसका काम गंभीर मुद्दे या वित्तीय घोटाले या जटिल विधेयक पर गहराई से जांच करना
Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) क्या है
Foreign Contribution Regulation Act भारत का कानून जो किसी भी संस्था जैसे एनजीओ ट्रस्ट या सोसाइटीज द्वारा विदेश से लिया गया फंड या चंदा का नियंत्रण करती है साथ में यह भी सुनिश्चित करती है कि इस पैसे का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल न हो हर वो वह संस्था जो विदेश से चंदा लेता है उनको FCRA Registration कराना अनिवार्य है यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है इस एक्ट को 1976 में लागू किया गया था इसमें अनेको बार संशोधन किया जा चुका है
कौन-कौन विदेशी योगदान प्राप्त नहीं कर सकता है
FCRA के तहत कुछ श्रेणियां के लोगों और संस्थानों पर विदेशी चंदा या फंड लेने पर प्रतिबंध है जैसे राजनीतिक दल, चुनाव के उम्मीदवार, legislature के सदस्य, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी और राजनीतिक संगठन
FCRA में कब कब संशोधन किया गया है
आपातकाल के समय विदेशी सरकारों के द्वारा भारत के आंतरिक मामलों को प्रभावित करने के आशंकाओं के कारण 1976 में FCRA पहली बार अधिनियमित किया गया जिसमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं

FCRA अधिनियम 2010
*पंजीकरण प्रमाण पत्र केवल 5 वर्ष के लिए वैध रहेगा इसके बाद इसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य है
*प्रशासनिक कार्यों पर विदेशी चलेगा केवल 50% तक खर्च किया जा सकता है
*किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को विदेशी फंड का स्थानांतरण पर प्रतिबंध है
FCRA अधिनियम 2020
*किसी भी संस्था को विदेशी फंड केवल भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई के नई दिल्ली स्थित FCRA के विशेष खाते से प्राप्त किया जा सकता है
*प्रशासनिक कार्य पर विदेशी चंदे का केवल 20% तक खर्च किया जा सकता है
*एनजीओ के प्रमुख पदाधिकारी के लिए आधार या पासपोर्ट पहचान के लिए अनिवार्य है
*जांच के दौरान निलंबन अवधि को बढ़ाकर 360 दिनों तक किया गया है जो पहले 180 दिन था
FCRA अधिनियम 2022
*भारतीयों को बिना अनुमति के विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने वाले फंड की सीमा को एक लाख से बढ़कर 10 लाख कर दिया गया है इसकी सूचना 30 दिन के अंदर करने के बजाय 90 दिन कर दिया गया है
*Compoundable (शमनीय )अपराधों की संख्या को बढ़ाकर 7 से 12 कर दिया गया है
*Compoundable अपराध जहां शिकायतकर्ता समझौता करता है आरोपी पर लगा अपराध हटाने के लिए सहमत होता है ऐसे अपराधों की संख्या 7 से 12 कर दिया गया है
FCRA अधिनियम 2026
*नामित प्राधिकरण का गठन
जब किसी एनजीओ या संगठन का पंजीकरण रद्द समर्पित या समाप्त हो जाने पर उसके संपत्ति या फंड का प्रबंध करने के लिए
*पंजीकरण समाप्ति कि समय सीमा
FCRA कि नवीनीकरण के लिए पंजीकरण की वैधता समाप्त होने से 6 महीने पहले आवेदन देना आवश्यक है यदि 90 दिन के कम समय में आवेदन करते हैं तो सुरक्षा एजेंसीयों से जांच और क्लीयरेंस के कारण renewable pending रहने के दौरान आप किसी विदेशी फंड ना तो प्राप्त कर सकते हैं और न ही नहीं इस्तेमाल कर सकते हैं
*यदि नवीनीकरण आवेदन नहीं करने या आवेदन देरी से करने या आवेदन स्वीकृत समय पर न होने पर पंजीकरण समाप्त माना जाएगा और परिसंपत्तियों या फंड पर नामित प्राधिकरण का अधिकार होगा
*पंजीकरण पुन स्थापित होने पर संपत्तियां या फंड वापस जा सकती है नवीनीकरण नहीं होने पर अस्थाई रूप से अधिग्रहण की जा सकती है या सरकारी निकायों को स्थानांतरित या बिक्री कर निपटान किया जा सकता है
*धार्मिक संस्थान
धार्मिक स्थल के मामले में प्राधिकरण संचालन का प्रबंध कर सकता है परंतु वास्तविक स्वरूप नहीं बदल सकते
FCRA को लेकर चिंताएं
*नामित प्राधिकरण को व्यापक शक्तियां देना कार्यपालिका के अतिक्रमण का कारण बन सकता है
*किसी संस्था को बनाने में विदेशी फंड का उपयोग हुआ है और संचालन के लिए भारतीय लोगों से चंदा लिया जाता है तो प्राधिकरण कैसे तय करेगा
*कुछ संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरा बता रहे हैं कि चर्च को बनाने में विदेशी चांदी का उपयोग हुआ हो और सिर्फ पंजीकरण समाप्त होने से इस पर से उनका नियंत्रण खो सकता है
*प्रशासनिक बिलंब के कारण पंजीकरण समाप्त होने पर संगठन की गतिविधियां बाधित हो सकती है
FCRA से जुड़े कुछ Cases
नोएल हार्पर बनाम भारत संघ
केंद्र सरकार ने 2020 में FCRA में संशोधित करते हुए दिल्ली की एसबीआई के मुख्य शाखा में एफसीआरए खाता खोलना अनिवार्य कर दिया था तथा साथ में विदेशी चंदों से प्राप्त धन की प्रशासनिक खर्चों की सीमा 50% से घटकर 20% कर दिया जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी
फैसला:- सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के संशोधनों की पूरी तरह से वैध बताया और यह साफ किया कि विदेशी चंदा प्राप्त करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसे विनियमित कर सकती है
लॉयर्स कलेक्टिव केस
यह प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के एनजीओ से जुड़ा मामला है
गृह मंत्रालय ने पाया कि यह संगठन विदेश से मिले फंड का इस्तेमाल उन गतिविधियों में किया है जो कानूनन प्रतिबंध थी साथ ही इंदिरा जयसिंह पर आरोप लगा कि वे सरकारी पद (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल) पर रहते हुए विदेशी फंड का लाभ लिया
कारवाई :- सीबीआई ने इस मामले में एफसीआरए के तहत एफआईआर दर्ज की और 2016 में संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया गया
Oxfam India Cases
आरोप :- ऑक्सफैम इंडिया ने अपने निर्धारित एफसीआई बैंक खाते के बजाय दूसरे खातों में विदेशी धनप्राप्त किया था इसके अलावा उन पर आरोप लगा कि उन्होंने भारत सरकार पर FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण का दबाव बनाने के लिए विदेशी सरकारों और संस्थाओं के जरिए प्रयास किया
करवाई :- सीबीआई ने उनके कार्यालय की तलाशी ली और इनका FCRA Renewable आवेदन खारिज किया
News Click Case
डिजिटल न्यूज़ पोर्टल News Click और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्था पर आरोप लगा कि उन्होंने ऑडियो विजुअल न्यूज़ प्रसारित करने वाली कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन किया और में यह भी आरोप लगा कि FCRA के तहत प्राप्त पैसा चीनी हीतो को बढ़ावा देने के लिए एक अमेरिकन नागरिक के जरिए रूट किया गया
करवाई :- सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में इस न्यूज़ पोर्टल और इसके संचालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किया
वेदांत पॉलिटिकल फंडिंग केस
2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि लंदन स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी वेदांता से चंदा लेने में भाजपा और कांग्रेस दोनों के द्वारा पुराने एफसीआई नियमों का उल्लंघन किया गया था
नतीजा :- इस मामले के बाद सरकार ने संसद में वित्त विधेयक के जरिए कानून में पूर्व व्यापी संशोधन किया जिससे विदेशी मूल की कंपनियों की सब भारतीय सहायक कंपनियों से राजनीतिक चंदा लेने को वैध बना दिया गया
विदेश में एफसीआरए जैसा कानून
अमेरिका में एफ ए आर ए Foreign Agents Registration Act (FARA) 1938 कानून है जो विदेशी एजेंट या सरकारों की ओर से राजनीतिक और जनमत को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की प्रदर्शित सुनिश्चित करता है
रूस में विदेशी फंडिंग पाने वाले गैर सरकारी संगठन (NGOs)और मीडिया संस्थान को विदेशी एजेंट के रूप में रजिस्टर करवाना अनिवार्य है
अमेरिकी संसद रिले मूर (Riley Moore ) ने इस प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल पर सवाल उठाएं और इसे कुछ धार्मिक समूह और ईसाइयों से जोड़कर टिप्पणी की थी
भारतीय पक्ष ने अमेरिकी की टिप्पणी पर स्पष्ट किया कि भारत में कानून बनाना और आंतरिक मामलों पर फैसला लेना देश का संप्रभु अधिकार है संसद इस पर अपने हिसाब से निर्णय लेगी